विरासत में मिली सम्पत्ति को हम बड़ी ही आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, परंतु उसी सम्पत्ति पर देय कर से बचते रहते हैं। जब कोई व्यक्ति आपके लिए अपनी सम्पत्ति छोड़ जाता है तो एक अधिकार के साथ साथ, कर देने की ज़िम्मेदारी भी आपको निभानी पड़ती है। अधिकतर लोगों को तो इस कर के विषय में कुछ जानकारी ही नहीं होती। कर नहीं भरने के कारण कभी कभी सम्पत्ति सील कर दी जाती है और कभी कभी कर पर जुर्माना इतना बढ़ जाता है कि वो सम्पत्ति की कीमतों से तो कहीँ ज्यादा हो जाता है। तो आज हम देखेंगे कि वो कौन से कर है जो आपको सम्पत्ति हस्तांतरण के पश्च्यात भरने पड़ते है।

Tax due on inherited property

सालाना कर

हम सभी जानतें है कि अगर किसी व्यक्ति के नाम कोई सम्पत्ति है तो उसे उस सम्पत्ति पर प्रॉपर्टी टैक्स भरना पड़ता है। क्योंकि अब ये विरासत की सम्पत्ति आपकी हो गयी है, इस पर लगने वाला कर भी आप ही को भरना पड़ेगा। अगर उस सम्पत्ति पर आप रह रहे है, तो कोई कर नही लगता। अगर ये घर आप किराये पर चढ़ा रहे है, तो किराया आपकी आय मानी जाती है और कर लगता है। ये कर आपकी प्रॉपर्टी के किराये के जितना होता है। प्रॉपर्टी टैक्स के अलावा आपको सालाना किराये का ३० प्रतिशत किरायेदारों को रख रखाव और मरम्मत के लिए खर्च देना होगा।

सम्पत्ति बेचेते वक़्त

विरासत में मिली सम्पत्ति को जब बेचते हैं तो उस पर कर लगता है। चाहे वो सम्पत्ति आप तीन साल से पहले बेचे या तीन साल के बाद, विक्रय रकम पर टैक्स लगता है। सम्पत्ति के बाजार मूल्य की गणना सम्पत्ति की खरीद मूल्य और समय के साथ हुई महँगाई और मरम्मत के खर्च को मिला के की जाती है। प्रॉपर्टी का आधार मूल्य वो होता है जिस कीमत पर आपके रिश्तेदार ने इसे खरीदा था। अगर उन्होंने इसे १ अप्रैल, १९८१  के पहले खरीदा था, तो इस तारीख पर जो इसका मूल्य था, आधार मूल्य बन जाता है। सम्पत्ति पर कर इसी आधार मूल्य पर लगता है।

property taxes इस विरासत में मिली सम्पत्ति पर देय कर से बचा जा सकता है अगर मुनाफे की रकम को सही जगह पर निवेश किया जाए। इसके दो तरीके हो सकते है। या तो आप इस सम्पत्ति को बेचने के २ साल के भीतर एक नया घर खरीद ले, या तीन साल के भीतर एक नए घर का निर्माण शुरू कर दे। और इन दोनों ही विकल्पों में आपको पूरी रकम लगाने की जरुरत भी नही है। आप भारत सरकार की परियोजनाओं जैसे रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन या नेशनल हाईवे अथॉरिटी के बांड ६ महीनो के लिए खरीद सकते हैं। इससे आपके ५० लाख रूपए बच जाएंगे।

विरासत में मिली सम्पत्ति पर कर आम सम्पत्ति से अलग होता है। अत: कोई भी प्रॉपर्टी को स्वीकार करने से पहले आप देय कर के विषय में सोच ले। कर देने की प्रक्रिया को टाला जा सकता है परंतु इससे बचा नही जा सकता। ऐसे में यही सही है कि सभी कर समय से भरे और सम्पत्ति का लाभ उठाये। अगर आप इस विषय में और अधिक जानकारी चाहते हैं तो तुरंत हमे संपर्क करे। हमारे विषय विशेषज्ञ आपकी सहायता कर सकते है।

 


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